यूएई व भारत द्विपक्षीय वायु सेवा समझौते पर फिर वार्ता शूरू करेगा


नई दिल्ली, 15 जून, 2019 (डब्ल्यूएएम) - भारत में यूएई के राजदूत डॉ. अहमद अब्दुलरहमान अल बन्ना ने भारत के नए नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ मुलाकात की और दोनों देशों के बीच नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सहयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। 30 मई को भारत में नई सरकार की शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी सरकार के मंत्रियाें के साथ यूएई की यह पहली आमने-सामने की बातचीत थी। यूएई के नेताओं ने पिछले महीने प्रधानमंत्री चुनाव में शानदार जीत के बाद टेलीफोन के जरिये मोदी को बधाई दी थी। पिछली सरकार में पुरी आवास व शहरी मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। इस समय उन्हें पिछले प्रभार के अलावा नागरिक उड्डयन का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। वह नई सरकार में वाणिज्य राज्य मंत्री भी हैं। राजदूत ने मंत्री को द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते की स्थिति के बारे में जानकारी दी और यूएई के नागरिक उड्डयन अधिकारियों के अनुरोध पर मौजूदा समझौते के रिवीजन के लिए बातचीत शुरू करने की तत्काल आवश्यकता को दोहराया, क्योंकि वर्तमान समझाैते के लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं। डॉ. अल बन्ना ने अमीरात समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम को बताया कि आज की चर्चा के दौरान यूएई द्वारा उठाए गए मुद्दों पर पुरी काफी सकारात्मक दिखे। मंत्री ने जोर दिया कि यूएई व भारत ने महत्वपूर्ण रणनीतिक संबंध साझा किए। द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते पर फिर वार्ता दो से तीन महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। डॉ. अल बन्ना ने पुरी से कहा कि यूएई खुले आसमान की नीति का पालन किया है तथा भारतीय वाहनाें के अमीरात में संचालन विस्तार के लिए अनुराेध करने पर कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि नागरिक उड्डयन बाजार की मौजूदा स्थिति प्रति क्षमता में वृद्धि कहा जाता है। वर्तमान में यूएई और भारत के बीच दोनों दिशाओं में प्रति सप्ताह 1,068 विमानाें काे उड़ान भरने की इजाजत है। यूएई एयरलाइंस की 400 से अधिक और भारत की 500 से अधिक विमानें उड़ान भरती हैं। यूएई के विमानाें की प्रति सप्ताह लगभग 138,000 सीटें बिकती हैं। डॉ. अल बन्ना ने कहा कि यूएई भारतीय शहराें में दाे और तीन विमानाें के परिचालन के विस्तार करने का इच्छुक हैं। यातायात की मांग में वृद्धि काे देखते हुए यूएई और भारत के बीच अधिक कार्गो उड़ानों के लिए भी गुंजाइश है। पुरी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि भारत की प्रमुख निजी जेट एयरलाइन हाल ही में बंद हाेने से गल्फ और अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनाें काे विदेशी यातायात अधिकार मिलना चाहिए। उन्हाेंने कहा था कि मैं मानता हूं कि भारत को विमानाें की संख्या पर इतने प्रतिबंधित नहीं होना चाहिए, यदि आपके पास घरेलू क्षमता है तो इसका उपयोग करें, अन्यथा आर्थिक अवसर से खुद को वंचित न करें। मुझे लगता है कि यदि आपके पास अधिक विमानें हैं ताे कीमत गिरेगी। जेट एयरवेज के पतन के बाद और भारत-पाकिस्तान के बीच हाल में उत्पन्न विवाद के कारण भारत के लिए पाकिस्तानी वायु सीमा बंद कर दिए जाने से भारत-गल्फ रूट पर यात्रियाें काे मूल्य वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली जैसे हवाईअड्डे से गल्फ देशों के लिए उड़ान भरने वाले विमानों को अब भारत के पश्चिमी क्षेत्र जैसे मुंबई या अहमदाबाद का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है और फिर वहां से गल्फ के लिए उड़ान भरता है। पहले विमानें पाकिस्तान से आगे निकल जाती थी, जिससे करीब एक घंटे से अधिक का समय बचता था। वर्तमान मार्ग की तुलना में इस रूट से इंधन की बचत हाेती थी। गल्फ से भारत वापस आने पर भी यह लागू होता है। गल्फ देशों के प्रमुख हवाई अड्डों के लिए जेट एयरवेज ने यातायात की उच्च व्यवस्था कर रखी थीं। कोई भी भारतीय घरेलू एयरलाईनें इन सीटों के अंतर को भरने में सक्षम नहीं हुआ है। पुरी ने जेट एयरवेज के बंद हाेने से विभिन्न एयरलाइनों काे विदेशी यातायात अधिकार देने के लिए समिति गठित की है। भारत की घरेलू एयरलाइनें अधिकार लेने की पुरजाेर काेशिश कर रहे हैं। घरेलू एयरलाइनाें काे क्षमता की समस्या है, इसलिए यात्रियों की समस्या काे कम करने के लिए खाड़ी एयरलाइनों को अधिकार आवंटित किए जा सकते हैं। इस बीच सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन (सीएपीए) ने वित्त वर्ष 2020 में भारत के विमानन क्षेत्र के लिए 500 से 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लाभ का अनुमान लगाया है। जेट एयरवेज बंद होने से पहले सीएपीए ने इस क्षेत्र में 550-700 मिलियन अमेरिकी डॉलर समेकित नुकसान की भविष्यवाणी की थी। अनुवादः वैद्यनाथ झा http://wam.ae/en/details/1395302767856

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