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चुनौतियों ने हमें अपने रास्ते पर चलने से कभी नहीं रोकाः मोहम्मद बिन राशिद


दुबई, 1 दिसंबर, 2021 (डब्ल्यूएएम) -- उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुबई के शासक हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने कहा कि चुनौतियों ने यूएई के लोगों को अपने रास्ते पर चलने से कभी नहीं रोका। यूएई के 50वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर यूएई सशस्त्र बलों की पत्रिका नेशन शील्ड को दिए अपने बयान में हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन राशिद ने कहा, ''चुनौतियों ने हमें अपने रास्ते पर चलने से कभी नहीं रोका और हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी खुद को चुनौती देना। हमें एक कुशल देश और एक महत्वाकांक्षी विकास मॉडल स्थापित करने की अपनी क्षमता को साबित करना था।'' इस अवसर पर उनका बयान कुछ इस तरह है। आप पर शांति हो, मैं आपको हमारे 50वें राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर बधाई देता हूं और ईश्वर ने हमें जो आशीर्वाद दिया है, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं उन्हें यूएई के गठन और इसकी स्थापना में योगदान करने का अवसर देने के लिए भी धन्यवाद देता हूं। आज हम देश के पहले 50 सालों की उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं और अपनी प्रगति की प्रशंसा करते हैं, हम अपने पिताओं को याद करते हैं जिन्होंने देश की स्थापना की और इसके विकास व समृद्धि की नींव रखी। हम अपने पिता स्वर्गीय शेख जायद बिन सुल्तान अल नहयान को याद करते हैं और उनके नेतृत्व व ज्ञान की हमारी प्रशंसा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। उसके बिना यूएई कभी वास्तविकता नहीं बन पाता। कृतज्ञता व प्रशंसा के साथ हम 18 फरवरी, 1968 को देश की नींव स्थापित करने में शेख जायद के सहयोगी स्वर्गीय शेख राशिद बिन सईद अल मकतूम को याद करते हैं। हम उनके भाइयों, अमीरात के शासकों को भी याद करते हैं, जिन्होंने उनका सहयोग किया और संघ को मजबूत करने में उनका साथ दिया। इस दिन हम अमीराती की पहली पीढ़ी को याद करते हैं जिन्होंने देश का निर्माण किया और देश की संस्थाओं की स्थापना के लिए निष्ठा और भक्ति के साथ कड़ी मेहनत की। शेख जायद के निधन को भले ही 17 साल बीत गए हों, लेकिन वह हमारे दिलों में जिंदा हैं और हर 2 दिसंबर को उनकी मौजूदगी मेरे दिल में बस जाती है। मैंने यूएई के गठन के बाद से उनके नेतृत्व में काम किया है। मैंने उनके मूल्यों और सिद्धांतों के साथ उनके फैसलों और रुख से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने हमेशा हमारे देश के हितों को प्राप्त करने, हमारे लोगों को खुश करने और संघ को मजबूत करने का लक्ष्य रखा। स्वर्गीय शेख जायद ने हमेशा संघ को मजबूत करने के लिए काम किया और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की स्थापना में मदद की और अरब सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रयासों का नेतृत्व करने में मदद की। नेतृत्व और शासन के मामले में स्वर्गीय शेख जायद की विरासत इस देश की पीढ़ियों के लिए मूल्यवान है। यह दूसरों के साथ संबंध स्थापित करने, सुलह, संकट प्रबंधन और चुनौतियों का सामना करने का एक सबक है। चुनौतियों ने हमें अपने रास्ते पर चलने से कभी नहीं रोका और हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी खुद को चुनौती देना। हमें एक कुशल देश और एक महत्वाकांक्षी विकास मॉडल स्थापित करने की अपनी क्षमता को साबित करना था। पिछले 50 सालों में हमने सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था में विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है। फिर भी हमने इन चुनौतियों का इस विश्वास के साथ सामना किया कि हमारा राष्ट्रीय महत्व विश्वास और आशावाद के साथ आत्मविश्वास से उनका सामना करना है। इसलिए हम देश के गठन के चरणों के दौरान और वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान पहले खाड़ी युद्ध, कुवैत के आक्रमण, इराक पर कब्जे और तथाकथित अरब स्प्रिंग के दौरान चुनौतियों का सामना करने में सक्षम थे। प्यारे देशवासियो, आज के दिन हमें सोचना चाहिए कि 50 साल पहले हम कहां थे और क्या बन गए हैं। मुझे लगता है कि 50 साल से कम उम्र की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा पूरी तस्वीर नहीं जानता। आंकड़ों, तथ्यों और घटनाओं के साथ तुलना करने का अब समय नहीं है, क्योंकि इसके लिए बहुत सी पुस्तकों की आवश्यकता होगी। वे शब्दों और ऑडियो-विजुअल मीडिया में प्रलेखित हैं और जनता के लिए उपलब्ध हैं। आज मैं अमीराती राष्ट्रीय पहचान की स्थापना को संबोधित करूंगा। किसी भी व्यक्ति की राष्ट्रीय पहचान की स्थापना आमतौर पर एक ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया होती है जिसके साथ कभी-कभी युद्ध और हिंसा भी होती है, जिसके कारण कुछ देशों में आंतरिक संघर्ष होते हैं। हालांकि, हमारी अमीराती पहचान के गठन में इसका कोई सामना नहीं हुआ, क्योंकि अमीराती लोग एक ही विश्वास, भूगोल, इतिहास, संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं से एकजुट कई समूहों से बना एक समुदाय हैं। आज मैं सरकारी प्रदर्शन की प्रक्रिया के बारे में सोचता हूं, जो शून्य से शुरू हुई लेकिन मंत्रालयों, संस्थानों और विधानों की स्थापना के लिए आगे बढ़ी जो कि अमीराती लोगों के लिए नए थे। आज मैं उस प्रक्रिया के बारे में सोचता हूं जिसने सहिष्णुता व सह-अस्तित्व के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए हमारे देश को उपलब्धियों, विकास और मानवीय पहलों के साथ उपयुक्त रुख और नीतियों से भरा एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कद प्राप्त करने में मदद की। प्रिय नागरिकों पिछले 50 सालों के सबक और अनुभव हमें अपने देश की सेवा के लिए और अधिक समर्पित होने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। आपके साथ और आपके द्वारा हम नई उपलब्धियां जोड़ेंगे और अपने अमीराती मॉडल को व्यापक डोमेन में ले जाएंगे। हम अपनी प्रगति और सभी सतत विकास सूचकांकों में नंबर एक बनने के अपने लक्ष्य को जारी रखेंगे। अनुवादः एस कुमार.

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