दुबई, 13 फरवरी, 2024 (डब्ल्यूएएम) -- भारतीय अर्थव्यवस्था वर्षों से विकास पथ पर है और अब केवल अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के बाद दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में रैंकिंग में है। हाल के वर्षों में इसने फ्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अनुमान और पूर्वानुमान के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था 2024 में पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगी और 2030 तक जापानी और जर्मन अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगी।
जनवरी में जारी IMF की विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि 2024 और 2025 में भारत में विकास दर 6.5 फीसदी मजबूत रहेगी, जिससे दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वृद्धि का अनुमान दो वर्षों के लिए दो प्रतिशत अंक बढ़ जाएगा, जो घरेलू मांग की ताकत को दर्शाता है।
फंड के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि विकास 2028 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा देगा।
स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ग्लोबल रेटिंग्स ने पिछली रिपोर्ट में कहा था कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा और 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
एजेंसी के अनुसार, भारत की GDP 2022 में लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह तीव्र आर्थिक विस्तार 2030 तक भारत को जापान की GDP से आगे ले जाएगा, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति मजबूत हो जाएगी, जिससे जर्मनी पीछे रह जाएगा। विशेष रूप से यह उपलब्धि भारत की दो साल पहले ब्रिटेन और फ्रांस की अर्थव्यवस्थाओं में पिछली उछाल के बाद आई है।
कई प्रमुख विकास चालक भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एजेंसी के आशावादी दीर्घकालिक पूर्वानुमान को रेखांकित करते हैं। भारत को आगे बढ़ाने वाले सकारात्मक कारकों में इसका विशाल और तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग है, जो देश में उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा दे रहा है। इसके अतिरिक्त भारत में क्रांति लाने वाले चल रहे डिजिटल परिवर्तन से ई-कॉमर्स विकास में उल्लेखनीय तेजी आने और अगले दशक के भीतर उपभोक्ता खुदरा परिदृश्य से नया आकार देने की उम्मीद है। इस बदलाव ने पहले से ही अग्रणी वैश्विक प्रौद्योगिकी और ई-कॉमर्स बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित किया है, जो इस बढ़ते अवसर का हिस्सा हासिल करने के लिए उत्सुक हैं।
इन दो प्रमुख कारकों के अलावा एजेंसी आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने वाले कई अन्य तत्वों पर भी प्रकाश डालती है।
अनुवाद - पी मिश्र.