अबू धाबी संघीय अपील न्यायालय ने आतंकवादी संगठन 'जस्टिस एंड डिग्निटी कमेटी' के मामले में प्रतिवादियों को दोषी ठहराया

अबू धाबी, 10 जुलाई 2024 (डब्ल्यूएएम) -- आज, बुधवार, 10 जुलाई 2024 को अबू धाबी संघीय अपील न्यायालय के राज्य सुरक्षा विभाग ने आतंकवादी मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन और छह कंपनियों के लीडर्स व सदस्यों सहित 53 प्रतिवादियों को केस संख्या 87/2023 - राज्य सुरक्षा अपराधों में दोषी ठहराया, जिसे मीडिया में आतंकवादी 'जस्टिस एंड डिग्निटी कमेटी' संगठन के रूप में जाना जाता है और आजीवन कारावास से लेकर एईडी 20 मिलियन के जुर्माने तक की सजा सुनाई।

न्यायालय ने देश में आतंकवादी कृत्य करने के उद्देश्य से आतंकवादी ‘'जस्टिस एंड डिग्निटी कमेटी’ संगठन बनाने, स्थापित करने और प्रबंधन करने के अपराध के लिए 43 प्रतिवादियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इसने पांच प्रतिवादियों को 'रिफॉर्म कॉल' संगठन के साथ सहयोग करने और देश के खिलाफ कार्रवाई करने के उद्देश्य से इसके उद्देश्य की पूर्व जानकारी के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर पोस्ट किए गए लेखों और ट्वीट्स में इसकी वकालत करने के लिए 15 साल की जेल की सजा भी सुनाई।

न्यायालय ने आतंकवादी संगठन बनाने, स्थापित करने और वित्तपोषण के अपराधों के लिए प्राप्त धन को वैध बनाने के अपराध के लिए पांच प्रतिवादियों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा और 10 मिलियन दिरहम के जुर्माने की सजा भी सुनाई।

इसके अलावा न्यायालय ने छह कंपनियों और उनके लिए जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना लगाने के पक्ष में भी फैसला सुनाया, जिसमें प्रत्येक पर 20 मिलियन दिरहम का जुर्माना लगाया गया और साथ ही उक्त कंपनियों के मुख्यालयों को बंद कर दिया गया, उनकी परिसंपत्तियों, उनके मूर्त व अमूर्त संपत्ति अधिकारों, निधियों, अचल संपत्ति को जब्त कर लिया गया और उपरोक्त अपराधों के लिए प्राप्त और उपयोग की गई सभी सामग्रियों, उपकरणों और सामानों को जब्त कर लिया गया। इन अपराधों में संगठित आपराधिक समूह द्वारा किया गया धन शोधन तथा आतंकवादी संगठन को वित्तपोषित करने के लिए धन शोधन शामिल है।

न्यायालय ने सहयोग करने और संगठन को धन उपलब्ध कराने के अपराध के लिए 24 प्रतिवादियों के विरुद्ध आपराधिक मामलों को खारिज करने का भी फैसला सुनाया तथा एक प्रतिवादी को बरी करने का फैसला सुनाया।

न्यायालय ने आज जारी किए गए फैसले के कारणों की पुष्टि की कि प्रतिवादियों को जिन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, उनमें आतंकवादी ‘जस्टिस एंड डिग्निटी कमेटी’ संगठन की स्थापना और प्रबंधन शामिल है, जो उन अपराधों से अलग व असंबंधित हैं जिनके लिए उन्हें 2012 के केस नंबर 79-राज्य सुरक्षा अपराधों में मुकदमा चलाया गया था। इसके अतिरिक्त मामले में प्रस्तुत साक्ष्य, जिसमें कई प्रतिवादियों के बयान, गवाहों की गवाही और प्रस्तुत तकनीकी रिपोर्ट शामिल हैं, प्रतिवादियों द्वारा अपराध किए जाने को साबित करने के लिए पर्याप्त थे।

न्यायालय ने सत्यापित किया कि प्रतिवादी 'रिफॉर्म कॉल' संगठन (मुस्लिम ब्रदरहुड, जिसे आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया गया है) का हिस्सा हैं, जिन्होंने देश में हिंसक घटनाओं को बनाने और दोहराने का काम किया है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस मामले में दिए गए फैसले के विरुद्ध संघीय सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।

न्यायालय ने मामले की जांच की और दस सुनवाईयों में मुकदमा आगे बढ़ाया, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि प्रतिवादियों के अधिकारों व गारंटी को कानून में निर्धारित अनुसार संरक्षित किया गया था। न्यायालय ने प्रतिवादियों को अपने वकील चुनने का अधिकार भी दिया और उन लोगों का बचाव करने के लिए एक वकील नियुक्त किया जिन्होंने खुद को नियुक्त नहीं किया था। न्यायालय ने उनके बचाव व उनके वकीलों की दलीलें सुनीं और लिखित रूप में प्रस्तुत किए गए बचाव ज्ञापनों की समीक्षा की।

अनुवाद - पी मिश्र.