अबू धाबी, 6 जनवरी, 2024 (डब्ल्यूएएम) -- नवंबर 2023 में बीमारी के साये के बीच नूरहान जमील अबेद पर उम्मीद की किरण चमकी। गाजा के 1000 कैंसर रोगियों के इलाज के लिए यूएई की उदार पहल से उत्साहित होकर नूरहान विश्वास की झलक लिए हुए यूएई पहुंचे। ढाई सालों तक ल्यूकेमिया से पीड़ित रहने के कारण गाजा में उसके उपचार को बढ़ते संकट के कारण लगातार खतरा बना हुआ था।
नूरहान फिलीस्तीनी कैंसर रोगियों के पहले समूह में से एक थे, जो राष्ट्रपति हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के यूएई के अस्पतालों में गाजा पट्टी के 1,000 घायल बच्चों और 1,000 कैंसर रोगियों को चिकित्सा उपचार प्रदान करने के निर्देशों के कार्यान्वयन में इलाज के लिए देश में पहुंचे थे।
नूरहान के ठीक होने के बाद घर लौटने के लिए तैयार अबू धाबी एयरपोर्ट पर उसके साथ खड़ी उसकी मां मनाल महमूद अबेद ने कृतज्ञता के आँसुओं से भर गया। उन्होंने कहा, "यूएई की पहल एक जीवनरेखा थी।" उसकी आवाज भावनाओं से भरी हुई थी। उन्होंने अमीरात समाचार एजेंसी (WAM) को बताया, "नूरहान उन पहले लोगों में से एक थे जिन्हें व्यापक मूल्यांकन से लेकर हर कदम पर सावधानीपूर्वक व्यवस्थित विशेष उपचार तक उच्चतम स्तर की देखभाल प्राप्त करने का लाभ मिला। आज ईश्वर और यूएई के सहयोग से मेरी बेटी कैंसर से मुक्त हो गई है।"
मनाल की गहरी कृतज्ञता तब प्रकट हुई जब उसने उस समर्पित मेडिकल टीम के बारे में बात की, जो चौबीसों घंटे नूरहान की देखभाल करती थी, संबंधित अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि उसकी जरूरतें पूरी हों और उनके प्रवास के दौरान गर्मजोशी भरे आतिथ्य ने उन्हें गले लगाया। उन्होंने कहा, "यूएई हमेशा फिलिस्तीनी लोगों के लिए सहयोग का एक स्तंभ रहा है। असाधारण उदारता के इस मानवीय कार्य ने विपरीत परिस्थितियों के बीच उम्मीद की डोर बुनते हुए अनगिनत बच्चों और परिवारों को जीवन वापस दिया है।"
जब वे अपने अस्थायी आश्रय स्थल को अलविदा कह रहे थे तो नूरहान ने न केवल अपने स्वास्थ्य में सुधार किया, बल्कि उस भूमि के प्रति प्रेम और सम्मान की गहरी भावना भी व्यक्त की जिसने उसकी बिखरी हुई दुनिया को सुधार दिया था। यूएई की निस्वार्थता की कहानी, जो उसके अस्तित्व में रची-बसी है, हमेशा मानवीय करुणा की उपचार शक्ति का एक प्रमाण होगी।
अनुवाद - पी मिश्र.