दुबई, 14 फरवरी, 2024 (डब्ल्यूएएम) -- उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुबई के शासक हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने "भविष्य की सरकारों को आकार देना" विषय के तहत दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट 2024 में सम्मानित अतिथि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए मुख्य भाषण में भाग लिया।
सत्र में दुबई के क्राउन प्रिंस और दुबई की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष हिज हाइनेस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम; दुबई के प्रथम उप शासक, उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री हिज हाइनेस शेख मकतूम बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम और उप प्रधान मंत्री और आंतरिक मंत्री हिज हाइनेस लेफ्टिनेंट जनरल शेख सैफ बिन जायद अल नहयान भी शामिल हुए।
सत्र में हिज हाइनेस शेख हमीद बिन जायद अल नहयान; अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी और परोपकारी परिषद के अध्यक्ष हिज हाइनेस शेख थेबा बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान; दुबई बंदरगाह और सीमा सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष हिज हाइनेस शेख मंसूर बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम; दुबई संस्कृति और कला प्राधिकरण की अध्यक्ष हिज हाइनेस शेखा लतीफा बिन्त मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम; सहिष्णुता और सह-अस्तित्व मंत्री शेख नहयान बिन मुबारक अल नहयान और कई वरिष्ठ अधिकारी ने भी भाग लिया।
अपने मुख्य संबोधन की शुरुआत में भारतीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनसे उनकी कई बार मुलाकात हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें "न केवल दूरदर्शिता वाला नेता, बल्कि संकल्पवान नेता और प्रतिबद्धता वाला नेता भी कहा।"
समिट में आमंत्रित करने के लिए हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिज हाइनेस के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा की, जिसने दुबई को दुनिया का आर्थिक, वाणिज्यिक और प्रौद्योगिकी केंद्र बनने में प्रमुख भूमिका निभाई। महामहिम ने एक्सपो 2020 और COP28 के उदाहरणों को "दुबई कहानी" के चमकदार उदाहरण के रूप में उजागर किया।
मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में आधुनिकता की ओर बढ़ने के बावजूद दुनिया को खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, शिक्षा और समावेशिता के मामले में व्यापक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। "आतंकवाद नए रूप धारण कर रहा है और मानव जाति के लिए नई चुनौतियाँ पेश कर रहा है। यहां तक कि जलवायु संबंधी चुनौतियाँ भी समय के साथ बड़ी होती जा रही हैं।"
उन्होंने कहा, "इन सभी सवालों, चुनौतियों और परिस्थितियों को देखते हुए वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट का महत्व और भी अधिक है।"
कोवि़ड-19 महामारी के दौरान भारत के अनुभव के बारे में बोलते हुए मोदी ने कहा, "हम अक्सर विशेषज्ञों को यह कहते हुए सुनते हैं कि महामारी के बाद लोगों का अपनी सरकारों पर भरोसा कम हो गया है। लेकिन भारत में लोगों का सरकार पर भरोसा बढ़ा है. क्योंकि उन्हें सरकार की मंशा और प्रतिबद्धता दोनों पर भरोसा है। हमने अपने शासन में लोगों की आकांक्षाओं को प्राथमिकता दी है।"
उन्होंने बताया, "पिछले 10 वर्षों में भारत ने 250 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। जब सरकारें पारदर्शिता को प्राथमिकता देती हैं तो इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं और भारत इसका एक अच्छा उदाहरण है। आज 1.3 बिलियन से अधिक भारतीय नागरिकों के पास एक डिजिटल पहचान है, जो लोगों के बैंक खातों और उनके मोबाइल फोन से जुड़ी है।"
प्रौद्योगिकी पर प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा किया कि कैसे भारत ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की प्रणाली विकसित करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया, जिससे सरकार के लिए भ्रष्टाचार की किसी भी गुंजाइश को खत्म करना संभव हो गया, जिससे देश का 33 बिलियन डॉलर का पैसा गलत हाथों में जाने से रोका जा सका।
उन्होंने सामाजिक और वित्तीय समावेशन पर अपनी सरकार के फोकस पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश ने फिनटेक सेवाओं और डिजिटल भुगतान में काफी प्रगति की है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान के बाद 500 मिलियन से अधिक लोग बैंकिंग प्रणाली में शामिल हो गए।
जलवायु संकट पर बात करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा, "जहां तक जलवायु परिवर्तन का सवाल है तो इससे निपटने के लिए भारत का अपना दृष्टिकोण है। सौर, विंड और पनबिजली के साथ भारत जैव ईंधन और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी काम कर रहा है। हमारी संस्कृति ने हमें सिखाया है कि हमने प्रकृति से जो कुछ भी लिया है, उसे वापस लौटाने का प्रयास करना चाहिए।"
उन्होंने अंत में कहा, "हम सभी के अपने-अपने शासन संबंधी अनुभव हैं। इसलिए हमें न सिर्फ मिलकर काम करना चाहिए, बल्कि एक-दूसरे से सीखना भी चाहिए। और यही इस समिट का उद्देश्य भी है क्योंकि यहां से निकलने वाले समाधान दुनिया के भविष्य को आकार देंगे।"
अनुवाद - पी मिश्र.